Atal Bihari Vajpayee ji ki kavita na main chup hun na gata hun in Hindi

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भारत के दसवें प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे।उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी। इसमें  उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया था।

न मैं चुप हूँ न गाता हूँ

सवेरा है मगर पूरब दिशा में

घिर रहे बादल

रूई से धुंधलके में

मील के पत्थर पड़े घायल

ठिठके पाँव

ओझल गाँव

जड़ता है न गतिमयता

स्वयं को दूसरों की दृष्टि से

मैं देख पाता हूं

न मैं चुप हूँ न गाता हूँ

समय की सदर साँसों ने

चिनारों को झुलस डाला,

मगर हिमपात को देती

चुनौती एक दुर्ममाला,

बिखरे नीड़,

विहँसे चीड़,

आँसू हैं न मुस्कानें,

हिमानी झील के तट पर

अकेला गुनगुनाता हूँ।

न मैं चुप हूँ न गाता हूँ। 

अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता - न मैं चुप हूँ न गाता हूँ

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